मृगतृष्णा रावण की लंका
वात्याचक्र समाया हैं
देव कैद पड़े हैं इसमें
प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं
अब अंधियारा और नहीं
औऱ किसी और का शोर नहीं
चल राहगीर मंजिल से मिलने
इस वसुधा का छोर नहीं
यह सब उसकी माया हैं
~kunwar manoj singh
मृगतृष्णा रावण की लंका वात्याचक्र समाया हैं देव कैद पड़े हैं इसमें प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं अब अंधियारा और नहीं औऱ किसी और का शोर नहीं ...