Saturday, May 9, 2020

वात्याचक्र

मृगतृष्णा रावण की लंका 
वात्याचक्र समाया हैं
देव कैद पड़े हैं इसमें 
प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं

अब अंधियारा और नहीं 
औऱ किसी और का शोर नहीं 
चल राहगीर मंजिल से मिलने
इस वसुधा का छोर नहीं

यह सब उसकी माया हैं  

~kunwar manoj singh 

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रुद्रमाणु भगवान महादेव की कविता by Manoj singh

वात्याचक्र

मृगतृष्णा रावण की लंका  वात्याचक्र समाया हैं देव कैद पड़े हैं इसमें  प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं अब अंधियारा और नहीं  औऱ किसी और का शोर नहीं ...