कनक भवानी हे चामुंडा ,काली कापालिक कुष्मांडा ।।
कालकाष्टा त्वम ही दुर्गा , तुलजा भवानी जगदम्बा ।।
मोगल आवड़ करणी देवल सचियाँ वांकल बरबंडा
लालण मालण रूपा शक्ति हंसावती सोहाय सदा
कालिके विधुते कौशिकै खेचरी सत्यमेधा विनिद्रा ! खगेश्वरी
नर्मदे कर्मनाशा पताका भूपाला योगाङ्गा सुजन्मा ! सुरेश्वरि
नमो चंड कंपाली कंकाली वाली नमो ब्राह्मणी शंकराशैलवाली
नमो कान्ति: दान्ता: प्रबुद्धा ओंकारा नमो: नन्दिनी वेदमाता: विपाशा
नमो भूत भुताळी नरमुंड वाळी नमो साक्षिणी शारदे श्री शुगाली
नमो सतीमाता विचित्रा: अभीरू: नमो मनु माता हरसिद्धि सुभेरू
नमो विश्वरूपा चिदानन्दनंदा नमो निर्विशेषा लघुरूप रूपा:
नमो सिंघ वाळी नमो बैल वाळी नमस्ते नमामि इडा काबे वाळी
नमो गीतगीता नमो सिद्धसीता नमामि भजामि हिंगळ देव राणी
हळ -हळळ हळ हळ ज्योत ज्वलन्त देवी दुर्गे चारणी
खळ खळळ खळ खळ खप्पर भरणी देवी दुर्गे चारणी
तू अम्ब हैं ! जगदम्भ हैं ! दृघधर्म हैं -परमेश्वरी
कात्यायनी ! ब्रह्मचारिणी ! माहेश्वरी ! नारायणी
डम डमम ममं मंम् डमरू बाजे देवी दुर्गे चारणी
घम घमम घम घम ताळ रमति देवी दुर्गे चारणी
~कुँवर मनोज सिंह
No comments:
Post a Comment