।।रुद्रमाणु।।
भूत पिशाच सुर , दानव आदि ,शर्प- गंधर्व , मनु ,प्राणी आदि
जिसे भजे संपूर्ण सृष्टि, हिमवान बर्फीला पर्वत ।
जिसका स्वामी भूत भयंकर , रावण को अभिमान है उस पर
दूज का शशि धरे वो , शशिधर निराकार वैरागी शंकर ।
काल के काल महाकाली संगी, जिसकी तिहु लोक में दृष्टि ।।
सहस्त्र चक्षु वाला त्रिचक्षी ,रुद्र शिवा महाकाल कैलाशी ।
हिमवान बर्फ़ीला पर्वत , उसका स्वामी वो भष्मेश्वर ।।
महादेव वो त्रिशूलधारी ,वो अघोर शमशान निवासी। ।
भव-सागर विष हलाहल धारी नीलकंठ श्री वो अविनाशी ,।।
अर्धनारीश्वर डमरुधारी आशुतोष दुःख कष्ट निवारी।
हे त्रिपुरान्तक मनुप्रिये चारुविक्रम के गुण गाँउ ।।
तिहुँ लोक मनु बताऊ ।।
Poet -kunwar manoj singh sodha
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