Saturday, September 28, 2019

जींवन अर्द्घ विराम हैं



बचपन बीता बादलों में
और जवानी प्रीत में
अब ये झरझर बन चुका है
रीत अब श्मशान तक
जल गया नश्वर यहीं तक
साथ दो गज ना दिया
चलो आत्मा तो अमर हैं
चलो ईश्वर द्वार तक

कभी सुख में कभी दुख में
कभी दुविधा- भार में
जीवन बंधा हैं बेड़ियों में
मुक्ति की अब आश हैं
छूट जाएं प्राण सहसा
जींवन अर्द्घ विराम हैं
             -kunwar manoj singh














Friday, September 20, 2019

द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है





 द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है 
 अंत नहीं आरंभ हुआ है !

 अब ह्रदय का दीप जला हैं 
 युद्ध मे अर्जुन कूद पड़ा है

 योगी लीला लीन हुआ है 
 गाण्डीव रण में गूँज पड़ा हैं 

  नव ऊर्जा संचार हुआ हैं
  कदम बढ़ाए निकल पड़ा हैं

  क्या नया सवेरा आएगा ?
  तो सुनो गौर से युग संतों 

  हाँ नया सवेरा आएगा !!
  पहले से अच्छा आएगा 

  अच्छे से अच्छा आएगा 
  आत्मविश्वास की उमंग भरे हैं
   
   समय उन्ही का आएगा 
   द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है 

   अंत नहीं आरंभ हुआ है !
   हे भारत के भावी सेवक 

   आओ खेल नया खेले
   कुछ नया करे! कुछ नया करे 
          
    ~kunwar manoj singh
          






रुद्रमाणु भगवान महादेव की कविता by Manoj singh

वात्याचक्र

मृगतृष्णा रावण की लंका  वात्याचक्र समाया हैं देव कैद पड़े हैं इसमें  प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं अब अंधियारा और नहीं  औऱ किसी और का शोर नहीं ...