Saturday, May 9, 2020

वात्याचक्र

मृगतृष्णा रावण की लंका 
वात्याचक्र समाया हैं
देव कैद पड़े हैं इसमें 
प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं

अब अंधियारा और नहीं 
औऱ किसी और का शोर नहीं 
चल राहगीर मंजिल से मिलने
इस वसुधा का छोर नहीं

यह सब उसकी माया हैं  

~kunwar manoj singh 

Monday, March 23, 2020

महारावल जवाहिर सिंह जैसलमेर

मोर पंख मुकुट हैं मेघ छत्र शीश  हैं
कृष्ण कुळ ताज़ हैं यादव के थम्भ हैं
तीक्ष्ण तीर वेग हैं मुख सूर्य तेज हैं
भूपन के भूप हैं जवाहर ब्रह्मदंड हैं
चन्द्र मणि तिलक हैं रुद्र केस जटा हैं
शम्भू की साख हैं साथ स्वांगियाय हैं
तेग अष्ट धार हैं
मूँछन पे तांव हैं इन्द्र रुप जवाहर हैं 
-कुँवर मनोज सिंह


सिद्ध जगदम्भ

 

कनक भवानी हे चामुंडा ,काली कापालिक कुष्मांडा ।।
कालकाष्टा त्वम ही दुर्गा , तुलजा भवानी जगदम्बा ।।
मोगल आवड़ करणी देवल सचियाँ वांकल बरबंडा
लालण मालण रूपा शक्ति हंसावती सोहाय सदा
कालिके विधुते  कौशिकै   खेचरी  सत्यमेधा विनिद्रा ! खगेश्वरी
नर्मदे कर्मनाशा पताका भूपाला योगाङ्गा सुजन्मा ! सुरेश्वरि
नमो चंड कंपाली कंकाली वाली नमो ब्राह्मणी शंकराशैलवाली
नमो कान्ति: दान्ता: प्रबुद्धा ओंकारा नमो: नन्दिनी वेदमाता:  विपाशा
नमो भूत भुताळी नरमुंड वाळी नमो साक्षिणी शारदे श्री शुगाली
नमो सतीमाता विचित्रा: अभीरू: नमो मनु माता हरसिद्धि सुभेरू
नमो विश्वरूपा चिदानन्दनंदा  नमो निर्विशेषा लघुरूप रूपा:
नमो सिंघ वाळी नमो बैल वाळी नमस्ते नमामि इडा काबे वाळी
नमो गीतगीता नमो सिद्धसीता नमामि भजामि हिंगळ देव राणी
हळ -हळळ हळ हळ ज्योत ज्वलन्त देवी दुर्गे चारणी
खळ खळळ खळ खळ खप्पर भरणी देवी दुर्गे चारणी
तू अम्ब हैं ! जगदम्भ हैं ! दृघधर्म हैं -परमेश्वरी
कात्यायनी ! ब्रह्मचारिणी ! माहेश्वरी ! नारायणी
डम डमम ममं  मंम्  डमरू बाजे देवी दुर्गे चारणी
घम घमम घम घम ताळ रमति देवी दुर्गे चारणी
~कुँवर मनोज सिंह

Saturday, September 28, 2019

जींवन अर्द्घ विराम हैं



बचपन बीता बादलों में
और जवानी प्रीत में
अब ये झरझर बन चुका है
रीत अब श्मशान तक
जल गया नश्वर यहीं तक
साथ दो गज ना दिया
चलो आत्मा तो अमर हैं
चलो ईश्वर द्वार तक

कभी सुख में कभी दुख में
कभी दुविधा- भार में
जीवन बंधा हैं बेड़ियों में
मुक्ति की अब आश हैं
छूट जाएं प्राण सहसा
जींवन अर्द्घ विराम हैं
             -kunwar manoj singh














Friday, September 20, 2019

द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है





 द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है 
 अंत नहीं आरंभ हुआ है !

 अब ह्रदय का दीप जला हैं 
 युद्ध मे अर्जुन कूद पड़ा है

 योगी लीला लीन हुआ है 
 गाण्डीव रण में गूँज पड़ा हैं 

  नव ऊर्जा संचार हुआ हैं
  कदम बढ़ाए निकल पड़ा हैं

  क्या नया सवेरा आएगा ?
  तो सुनो गौर से युग संतों 

  हाँ नया सवेरा आएगा !!
  पहले से अच्छा आएगा 

  अच्छे से अच्छा आएगा 
  आत्मविश्वास की उमंग भरे हैं
   
   समय उन्ही का आएगा 
   द्वंद अभी प्रारंभ हुआ है 

   अंत नहीं आरंभ हुआ है !
   हे भारत के भावी सेवक 

   आओ खेल नया खेले
   कुछ नया करे! कुछ नया करे 
          
    ~kunwar manoj singh
          






Friday, August 9, 2019

उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ -kunwar manoj singh


    उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ

स्वच्छंद खड़ा है अडिग हिमालय ,निर्मल बहती गंग धारा
केदार खड़ा है बीच हिमालय बद्री में विष्णु ज्वाला
कश्मीर खड़ा हैं कश्यप का और अमरनाथ का उजियारा
खप्पर लिए खड़ी हैं काली , पहने नरमुंडी माला।
पञ्च नीर पंजाब खड़ा है अम्बरसर साहिब गुरुद्वारा ।।१।।

कौन उठाये खड़ग भुजा में , कौन हरे दुःख सबका
कौन करे वध रावण का , कौन जलायेगा लंका
कौन चलाये रथ अर्जुन का , कौन बनेगा संजय सबका
कौन करे आह्वान रुद्र का , कौन कर्ण सा मित्र  बनेगा
किसकी बलि चढ़ेगी युद्ध में ,फहराएगा कौन तिरंगा
कौन विजय होगा इस रण में किसके हाथ मे धर्म धरेगा ।२।

कौन बनेगा भीष्म पितामह , कौन करेगा प्रण प्रतिज्ञा
कौन सहेगा तीर युद्ध मे ,कौन बने झाला माना
किसके अस्सी घाव लगेंगे , कौन बने राणा सांगा ।
किसकी खड़गे प्यासी होगी किसका रण में रक्त बहेगा
किसका धड़ लड़े ,बिन मस्तक कौन आलाजी झंझ बनेगा ।।३।।

फूंको पाञ्चजन्य श्री कृष्ण  , महाभारत फिर से होगा
एक तरफ पांडव रण में और एक तरफ कौरव होंगा
सौ सौ वीर,  होंगे इस रण में , अभिमन्यु अकेला ही होगा
गाण्डीव की टंकार बजेगी ,विजय यहां पर गूँजेगा
गदा भीम की भीष्ण भिड़ेगी  पराजय दुर्योधन ही होगा
युद्ध अधर्मी  हो जितना विजय  , सुदर्शन ही होगा
कितना भी हो शत्रु सफल पर अंत सनातन ही होगा ।।४।।


रण में रणभेरी गूँज उठी ,समक्ष शत्रु की सैन्य खड़ी
प्रथम शीश कटेगा किसका , हारावल किसका होगा
कौन बनेगा भक्त रुद्र का किसके शीश की भस्म चढ़ेगी
किसके भय से भागे अकबर किसका भाला जय होगा ।।५।।

“ उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ
हुंकार भरो ,ललकार करो चौड़ी छाती में प्राण भरो
निश -दिन बढ़ते अँधियारे का राम बाण से नाश करो “

ललकार रहा है प्रताप सिंह हल्दी घाटी का राणा
ललकार रहा  राठौडी दुर्गा  मारवाड़  का रखवाला
कान्हड़ लडता उस रण में ,लड़ता वीरम हुँकार रहा
मुगलो से भिड़ने वाला शिवा सरदार पुकार रहा
आज़ाद हिंद के सपने लेकर सुभाष बोस ललकार रहा।।६।।

उठो जागो और रुको नहीं कहता विवेक पुकार रहा
फाँसी के तख्ते पर हँसता वो युवा ललकार रहा
उठो राष्ट्र के युवा जागो गाँधी तुम्हे पुकार रहा
ललकार रहा ,फुफकार रहा ,हुँकार रहा हैं  राणा कुंभा
अकबर की छाती पर बैठा चन्द्रसेन ललकार रहा
उठो राष्ट्र के युवा जागो भारत तुम्हे  पुकार रहा
करगिल का हर खोया सैनिक आज तुम्हे ललकार रहा।।७।।

हार गयी जागीरें उनकी ,तलवारे जिनकी जंग लगी
जीत गए नर वो भुताळे , जिनकी ढालें रण् चंड बनी
तलवार उठा या क़लम उठा या उठा सत्य वाला बीड़ा
उठा राष्ट्र या उठा पौरुष या  उठा पद्मनि का डोला
उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ
हुंकार भरो ,ललकार करो चौड़ी छाती में प्राण भरो
निश- दिन बढ़ते अँधियारे का राम बाण से नाश करो।।८।।
                                                                     #कुँवर मनोज सिंह

Saturday, July 27, 2019

फिर भी पूछे युवा युग के क्षत्रियों ने क्या -क्या काम किये?

फिर भी पूछे  युवा युग के क्षत्रियों ने क्या -क्या काम किये ?

युग के युवा प्रश्न पूछते क्षत्रियों ने क्या-क्या काम किये ?
कब हमने अत्याचार किये और कब तोड़े देवालय
कौन भिड़े थे शत्रु दल से किसने झेले अंधियारे
किसकी पत्नी सती चढ़ी और कौन के पुत्र अनाथ हुए
तलवारों की छाया में कौन जवानी झोंक चले
किन अभागन माताओं ने अपने पुत्र दान दिए
और किन -किन बूढ़े बापो ने अपने हाथ से तिलक किये
कौन हुए वो रज के रक्षक  जिनके रण में शीश कटे
कहाँ हुए वो सत्य दूत वचनों पर जिसने प्राण तजे
फिर भी पूछे  युवा युग के क्षत्रियों ने क्या -क्या काम किये ।।१।।

वंश नहीं में दुष्ट कंस का , मैं राष्ट्र का सेवक हूँ
मैं राष्ट्र का अभिन्न अंग हूँ पुरषार्थ का प्रेरक हूँ 
मैं अर्जुन के रथ को हांकूँ योगिराज श्री कृष्ण हूँ
मैं दसरथ का पुत्र राम हूँ मैं रावण का नाशक हूँ
 मैं रामचंद्र मर्यादा पुरु श्री श्रेष्ठ धनुर्धर लंका जयी ।।२।।

कौरव -पांडव भी क्षत्रिय थे ,कौरव आततायी थे
तब किसने भाइयों के प्राण लिये और किसने धर्म का ध्वज रखा
कौन भिड़ा था दुष्ट शकों से ! किसने उन्हें तड़ीपार किया
कौन लड़ा था यूनानो से किसने दो -दो हाथ किया ।
हूणों से किसने  युद्ध किए और किसने उन्हें खदेड़ दिया ।।३।।

किसने तुर्को के तीर सहे ! किसने गोरी के घात सहे
किसने क़ातिल ख़िलजी के नाकों में नथ भी बींध दिए
किसने बाबर में भय भरा !किसने मदिरा छुड़वायी
किस कुल में राणा प्रताप हुए ! किस कुल में दुर्गादास हुए
कहाँ हुए पैदा सांगा जी ! वीर चन्द्रसेन कहाँ हुए
औरंगजेब  के अंग अंग में किसने मृत्युमय भय भरा ? ।।४।।

क्यों जलते अंगारों में पद्मनियो ने प्राण तजे
क्यों गोरा बादल ने अपने अंग अंग को दान दिये ।
क्यों भीमदेव !हमीर लड़े थे सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में ।।५।।

किन की आज़ादी में लिये विश्व युद्ध मे भाग लिये
किसने अपने राष्ट्र दिए भारत को एक बनाने को
किसने महलों का दान किया , किसने भवन भेंट कीए ।
किसने अपने किले दिए और सेनाए किसने भेंट करी ।।
युग के युवा प्रश्न पूछते क्षत्रियों ने क्या-क्या काम किये?।।६।।
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रुद्रमाणु भगवान महादेव की कविता by Manoj singh

वात्याचक्र

मृगतृष्णा रावण की लंका  वात्याचक्र समाया हैं देव कैद पड़े हैं इसमें  प्रगल्भ भी समझ ना पाया हैं अब अंधियारा और नहीं  औऱ किसी और का शोर नहीं ...