उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ
स्वच्छंद खड़ा है अडिग हिमालय ,निर्मल बहती गंग धारा
केदार खड़ा है बीच हिमालय बद्री में विष्णु ज्वाला
कश्मीर खड़ा हैं कश्यप का और अमरनाथ का उजियारा
खप्पर लिए खड़ी हैं काली , पहने नरमुंडी माला।
पञ्च नीर पंजाब खड़ा है अम्बरसर साहिब गुरुद्वारा ।।१।।
कौन उठाये खड़ग भुजा में , कौन हरे दुःख सबका
कौन करे वध रावण का , कौन जलायेगा लंका
कौन चलाये रथ अर्जुन का , कौन बनेगा संजय सबका
कौन करे आह्वान रुद्र का , कौन कर्ण सा मित्र बनेगा
किसकी बलि चढ़ेगी युद्ध में ,फहराएगा कौन तिरंगा
कौन विजय होगा इस रण में किसके हाथ मे धर्म धरेगा ।२।
कौन बनेगा भीष्म पितामह , कौन करेगा प्रण प्रतिज्ञा
कौन सहेगा तीर युद्ध मे ,कौन बने झाला माना
किसके अस्सी घाव लगेंगे , कौन बने राणा सांगा ।
किसकी खड़गे प्यासी होगी किसका रण में रक्त बहेगा
किसका धड़ लड़े ,बिन मस्तक कौन आलाजी झंझ बनेगा ।।३।।
फूंको पाञ्चजन्य श्री कृष्ण , महाभारत फिर से होगा
एक तरफ पांडव रण में और एक तरफ कौरव होंगा
सौ सौ वीर, होंगे इस रण में , अभिमन्यु अकेला ही होगा
गाण्डीव की टंकार बजेगी ,विजय यहां पर गूँजेगा
गदा भीम की भीष्ण भिड़ेगी पराजय दुर्योधन ही होगा
युद्ध अधर्मी हो जितना विजय , सुदर्शन ही होगा
कितना भी हो शत्रु सफल पर अंत सनातन ही होगा ।।४।।
रण में रणभेरी गूँज उठी ,समक्ष शत्रु की सैन्य खड़ी
प्रथम शीश कटेगा किसका , हारावल किसका होगा
कौन बनेगा भक्त रुद्र का किसके शीश की भस्म चढ़ेगी
किसके भय से भागे अकबर किसका भाला जय होगा ।।५।।
“ उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ
हुंकार भरो ,ललकार करो चौड़ी छाती में प्राण भरो
निश -दिन बढ़ते अँधियारे का राम बाण से नाश करो “
ललकार रहा है प्रताप सिंह हल्दी घाटी का राणा
ललकार रहा राठौडी दुर्गा मारवाड़ का रखवाला
कान्हड़ लडता उस रण में ,लड़ता वीरम हुँकार रहा
मुगलो से भिड़ने वाला शिवा सरदार पुकार रहा
आज़ाद हिंद के सपने लेकर सुभाष बोस ललकार रहा।।६।।
उठो जागो और रुको नहीं कहता विवेक पुकार रहा
फाँसी के तख्ते पर हँसता वो युवा ललकार रहा
उठो राष्ट्र के युवा जागो गाँधी तुम्हे पुकार रहा
ललकार रहा ,फुफकार रहा ,हुँकार रहा हैं राणा कुंभा
अकबर की छाती पर बैठा चन्द्रसेन ललकार रहा
उठो राष्ट्र के युवा जागो भारत तुम्हे पुकार रहा
करगिल का हर खोया सैनिक आज तुम्हे ललकार रहा।।७।।
हार गयी जागीरें उनकी ,तलवारे जिनकी जंग लगी
जीत गए नर वो भुताळे , जिनकी ढालें रण् चंड बनी
तलवार उठा या क़लम उठा या उठा सत्य वाला बीड़ा
उठा राष्ट्र या उठा पौरुष या उठा पद्मनि का डोला
उठो राष्ट्र के युवाओं कब का भानु उदय हुआ
हुंकार भरो ,ललकार करो चौड़ी छाती में प्राण भरो
निश- दिन बढ़ते अँधियारे का राम बाण से नाश करो।।८।।
#कुँवर मनोज सिंह